बुधवार, 10 अक्तूबर 2018

General Knowledge || Day's Observance || आज के दिन का इतिहास || नवरात्री

General Knowledge || Day's Observance || आज के दिन का इतिहास



दोस्तो मेरे बलॉग के इस स्कंध में आप पाएँगे सामान्य ज्ञान ,General Knowledge उन दिनों के बारे में जो आप मनाते हैं ,Day's Observance  उन दिनों के बारे में जिन्हें पूरा विश्व मनाता है | जाने आज के दिन का इतिहास |



नवरात्रि :  जाने नवरात्रि के बारे में

जय माता दी दोस्तों  ! 


जैसा कि आप सभी को मालूम है कि कल से नवरात्रि शुरू हो रही है , तो इसी के उपलक्ष्य पर हम कुछ जानेंगे !

नवरात्रि के प्रकार : नवरात्रि साल में चार बार आती है , जिन में से दो तो गुप्त नवरात्रियाँ हैं इन्हें गुप्त कहने से मतलब है कि बहुत कम ही इन के बारे में जानते हैं, यह दो नवरात्रियाँ हैं माघ और आषाढ में पडने बाली, इन नवरात्रियों में अधिकतर ऋषि मुनी ही माता के विभिन्न रूपों कि पूजा  करते हैं !

बाकि दो नवरात्रियाँ हैं :-



1.  चैत्र मास में शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होते हुए रामनवमी तक

2. शारदीय नवरात्र आश्विन माह कि शुक्ल प्रतिपदा से लेकर विजयदशमी के दिन तक !

इन दोनों नवरात्रों कि पूजा विधि एक समान है !आश्विन माह कि शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के बाद दशहारा आता है !

नवरात्र का अर्थ

पौराणिक कथाओं  के अनुसार  जब     माता पार्वती ने भगवान शिव से इस बारे में पूछा तो उन्होंने इसके प्रयोजन का उद्देश्य बताया था. भगवान शिव ने कहा  :-   

नव शक्तिभिः संयुक्तं नवरात्रं तदुच्यते
एकैब देव-देवेशि नवधा परितिष्ठता।।

जिस का अर्थ है नवरात्रि में नौ शक्तियों का एक अनुष्ठान है, जिसमें नौ शक्तियों के अलग-अलग रूपों की प्रतिदिन पूजा की जाती है. मार्कंडेय पुराण के अनुसार इन नौ शक्तियों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री हैं!

 पूजा के दौरान दुर्गा-सप्तशती का पाठ करते हैं, जिसका  वर्णन मार्कंडेय पुराण में किया गया है !



पूजा विधि

दोस्तों इस भागदौड भरी जिंदगी में आप सभी पूजा करना चाहते हैं पर कर नहीं पाते तो मैं आप को आसान सा तरीका बताता हूँ,इतना ख्याल रखें कि पूजा के दिनों में ब्रह्म्चर्य का पालन करें और पवित्रता के साथ पूजा करें और माता के प्रति आस्था व विश्वाश रखें !

पहले दिन कलश स्थापना करें और माता के मंत्रका  जाप शुरू कर दें  मंत्र के लिए क्लिक करें ! हर दिन के  लिए एक  संख्या निश्चित कर लें और उसी संख्या में रोज जाप करें !  दुर्गा-सप्तशती का  पाठ भी अनिवार्य है ! 

Navratri: About Navratri 

Jai mata di friends! As you all have the same that tomorrow is starting, so we will know something on the occasion! Regarding Navratri, most of the sages worship the different forms of the mother. The remaining two 'Navratris' are:-

The remaining two 'Navratris' are :- 

1.  Starting from Shukla Pratipada in Chaitra month till Ram Navami 

2. Shardiya Navratri from Shukla Pratipada of Ashwin month to Vijayadashami day! The worship method of both these Navratras is the same!

Meaning of Navratri According to mythology, when Mother Parvati asked Lord Shiva about this, he told the purpose of its purpose. 

Lord Shiva said :- Nava shaktibhih sanyuktam navratra taduchyate Ekaib Dev-Deveshi Navadha Priestishtha. 

Which means there is a ritual of nine powers in Navratri, in which different forms of nine shaktis are worshiped daily. According to Markandeya Purana, these nine powers include Shailputri, Brahmacharini, Chandraghanta , There are Kushmanda, Skandmata, Katyayani, Kalratri, Mahagauri and Siddhidatri. During worship, we recite Durga-Saptashati, which is described in the Markandeya Purana. worship method Friends, in this run-of-the-mill life, all of you want to worship but can't, then I will tell you a simple way, so take care that on the days of worship, follow celibacy and worship with purity and have faith and devotion towards the mother. Have faith!


Establish the Kalash on the first day and start chanting the mother's Mantra. Fix a number for every day and chant the same number daily. The recitation of Durga Saptashati is also mandatory!






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